Balraj sahni बलराज साहनी facts in hindi
| Born | Yudhishthir Sahni1 May 1913 Rawalpindi, Punjab, British India (present-day Punjab, Pakistan) |
| Died | 13 April 1973 (aged 59) Bombay, Maharashtra, India |
| Occupation | Actor, writer |
| Years active | 1946–1973 |
बलराज साहनी के किस्से:तीन महीने जेल में रहकर की थी फिल्म 'हलचल' की शूटिंग, 'दो बीघा जमीन' में रिक्शेवाले के किरदार के लिए सड़कों पर घंटों रिक्शा खींच कर तैयारी करते थे
आज हम बात कर रहे हैं भारतीय सिनेमा के उस कलाकार के बारे में जिसने ‘हम लोग’, ‘दो बीघा जमीन’, ‘वक्त’ और ‘काबुलीवाला’ जैसी फिल्मों के जरिए गहरा संदेश देने की कोशिश की। वो कलाकार जिसने अपनी कोई स्टाइल नहीं बनाई पर हमेशा परदे पर अपने किरदार के जरिए समाज में बदलाव लाने की कोशिश की। जानिए राइटर और एक्टर बलराज साहनी से जुड़े कुछ किस्से जिनकी 1 मई को बर्थ एनिवर्सरी है।
दिलीप के कहने पर मिली ‘हलचल’, तीन महीनों के लिए जेल गए पर नहीं रुकी शूटिंग
अपने किरदारों को जीवंत बनाने के लिए बलराज साहनी अपने हर किरदार को असल में जीते थे। 1951 में आई फिल्म ‘हलचल’ में दिलीप कुमार के कहने पर के. आसिफ ने बलराज को जेलर का रोल दिया। बलराज भी अपने रोल को लेकर उत्साहित थे और आसिफ के साथ आर्थर रोड जेल पहुंचे। तय हुआ कि वे जेलर के साथ कुछ दिन बताएंगे और अपने किरदार के लिए तैयारी करेंगे।
इसी दौरान एक दिन बलराज एक जुलूस में शामिल हुए, जहां हिंसा भड़कने पर कई लोगों के साथ साहनी को भी गिरफ्तार कर लिया गया और वे वाकई में जेल पहुंच गए। फिर एक दिन के.आसिफ उनसे मिलने जेल पहुंचे और साहनी को पहचान कर जेलर ने उन्हें जेल में रहकर शूटिंग करने की छूट दी। इसके बाद साहनी रोज सुबह फिल्म की शूटिंग पर जाते और शाम को वापस जेल लौट आते। करीब तीन महीने तक उन्होंने जेल में रहकर ही फिल्म ‘हलचल’ की शूटिंग की थी।
बेटे से बोले, ‘मेरे पीछे नहीं, सामने सिगरेट पियो’
एक इंटरव्यू में बलराज के बेटे परीक्षित साहनी ने बताया था कि पिता के साथ उनका रिश्ता बाप-बेटे का नहीं, बल्कि अनोखा ही रहा है। उन्होंने शुरू में ही मुझसे कह दिया था कि मुझे अपना पिता मत समझ, मैं तेरा दोस्त हूं। वो कहते थे कि मेरे पीछे सिगरेट क्यों पीते हो, मेरे सामने पियो। कभी कोई बात मुझसे मत छुपाना। पहली बार सिगरेट और वाइन मैंने अपने पिताजी के सामने ही पी थी। बाप-बेटे का ऐसा अनोखा रिश्ता विरले ही होता है।
मेरा किरदार तो गरीब का है और आप सूट पहनकर आए हैं?
फिल्म ‘दो बीघा जमीन’ से बलराज के जुड़ने का किस्सा भी दिलचस्प है। बिमल रॉय ने इस फिल्म के लिए बलराज से पहले अशोक कुमार, त्रिलोक कपूर और नाजिर हुसैन के नाम पर भी विचार किया था। खैर बिमल ने बलराज साहनी की फिल्म ‘हम लोग’ देखी और तय किया कि बलराज को इस फिल्म में लीड रोल देंगे। उन्होंने बलराज को बुलाया तो वे सूट-बूट में बिमल के ऑफिस पहुंच गए। उन्हें देखकर बिमल चकरा गए क्योंकि उन्हें देखकर किसी भी एंगल से ऐसा नहीं लग रहा था कि वे नौजवान रिक्शेवाले का किरदार निभा पाएगा। तभी बिमल ने बलराज से कहा, ‘मिस्टर साहनी आप किरदार में बिल्कुल फिट नहीं बैठते। मेरी फिल्म का किरदार तो एक गरीब रिक्शाचालक का है।’ इस पर साहनी ने बिमल को एक बार उनकी फिल्म ‘धरती के लाल’ देखने का आग्रह किया। बिमल ने फिल्म देखी और फिर संतुष्ट होकर बलराज को यह रोल दिया। इसके बाद बलराज अपने किरदार की तैयारी के लिए बंबई की सड़कों पर रोजाना घंटों रिक्शा खींचते थे।
‘गुड़िया’ की हीरोइन से शादी की
1936 में बलराज ने दमयंती साहनी से विवाह किया जो उनकी फिल्म ‘गुड़िया’ की हीरोइन थीं। लेकिन कम उम्र में उनका निधन हो गया। दो साल बाद 1947 में बलराज ने संतोष चंदोक से शादी रचा ली। बलराज तैराकी के भी बड़े शौकीन थे। कहा जाता है कि लेक को एक छोर से दूसरे छोर तक तैरकर पार कर जाते थे। इसके अलावा वे सामाजिक कार्यों से भी खूब जुड़े रहे। कम्युनिस्ट विचारधारा के बलराज मजदूरों-मेहनतकश लोगों से बड़ा लगाव रखते थे।
गांधी जी ने भेजा लंदन, वापस लौटे तो मिला फिल्मों में पहला ब्रेक
बलराज साहनी का वास्तविक नाम युधिष्ठिर साहनी था। मई 1913 में भेरा पंजाब (अब पाकिस्तान) में जन्मे बलराज को पढ़ाई-लिखाई में गहरी रुचि थी, जिसके चलते उन्होंने एमए इन इंग्लिश लिटरेचर की डिग्री हासिल की और रबीन्द्रनाथ टैगोर के शांति निकेतन में बतौर लेक्चरर काम किया। 1938 में उन्होंने महात्मा गांधी के साथ मिलकर काम किया है। उन्हीं के जरिए वे 1939 में लंदन गए जहां उन्होंने चार साल तक बीबीसी के लिए बतौर रेडियो अनाउंसर काम किया। यहां से 1943 हिंदुस्तान आए तो पीपुल थिएटर एसोसिएशन (इप्टा) से जुड़ गए। यहां इनकी मुलाकात ख्वाजा अहमद अब्बास से हुई, जिन्होंने आगे चलकर बलराज साहनी को 1946 में रिलीज हुई ‘धरती के लाल’ फिल्म में अभिनय करने का मौका दिया। हालांकि बलराज को पहचान 1951 में रिलीज फिल्म ‘हम लोग’ से मिली और इसके दो साल बाद 1953 में आई ‘दो बीघा जमीन’ उनके करियर में मील का पत्थर साबित हुई।
source: https://www.bhaskar.com/entertainment/bollywood/news/balraj-sahni-birth-annivesary-know-some-interesting-facts-about-the-actor-128457523.html





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