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धनिया




त्रिदोषीय स्थिति : तीनों दोषों के लिए ठीक है। विकृति में उन्ह संतुलित करती है। रस : मधुर, कटु । वीर्य : ठंडा ।


धनिया


धनिये के बीज तथा पतियां इस्तेमाल की जा धनिये के बीज कुछ गोलाई लिए हुए पीले रंग क होते हैं। पत्तियां और बीज दोनों ही अत्यधिक • सुगंधित होते हैं तथा भोजन पकाने में इस्तेमाल किए जाते हैं। गर्मी लगने से पैदा होने वाले ज्वर को धनिया ठीक करता है। यह स्नायु तथा मस्तिष्क दोनों को शक्ति देता है। अधिक लहसुन के दुष्प्रभाव को दूर करता है। प्रतिदिन की मात्रा : 3 से 6 ग्राम।


त्रिदोषीय स्थितिः धनिया तीनों दोषों को सामंजस्य की स्थिति में लाकर त्रिदोषों का उपचार करता है। रस मधुर, कटु, तिक्त, कषाय । वीर्य : ठंडा ।


अहा! जिंद


अप्रैल 2016


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धनिये के बीज तथा पतियां इस्तेमाल की जा धनिये के बीज कुछ गोलाई लिए हुए पीले रंग क होते हैं। पत्तियां और बीज दोनों ही अत्यधिक • सुगंधित होते हैं तथा भोजन पकाने में इस्तेमाल किए जाते हैं। गर्मी लगने से पैदा होने वाले ज्वर को धनिया ठीक करता है। यह स्नायु तथा मस्तिष्क दोनों को शक्ति देता है। अधिक लहसुन के दुष्प्रभाव को दूर करता है। प्रतिदिन की मात्रा : 3 से 6 ग्राम।


त्रिदोषीय स्थितिः धनिया तीनों दोषों को सामंजस्य की स्थिति में लाकर त्रिदोषों का उपचार करता है। रस मधुर, कटु, तिक्त, कषाय । वीर्य : ठंडा ।


अहा! जिंद


अप्रैल 2016


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