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सौंफ

 सौंफ


खाद्य पदार्थों में तथा भोजन के बाद मुख शुद्धि के लिए सौंफ का प्रयोग किया जाता है। सौफ का तेल दर्द दूर करने के लिए प्रयुक्त होता है। सौंफ के दाने हल्के हरे रंग के तथा मीठे होते हैं। 3 से 6 ग्राम प्रतिदिन अथवा 5 से 10 बूंदें इसके तेल की प्रतिदिन प्रयोग की जानी चाहिए। सौंफ के बीज मूत्रल होते है। त्रिदोषीय स्थिति : यह दूषित वात तथा पित्त को शांत करती है। रस: मधुर, कटु, कषाय । वीर्य : ठंडा ।


मुलैठी


इसके पौधे की जड़ इस्तेमाल की जाती है। मुलैठी चीनी से 50 गुना • ज्यादा मीठी होती है। गले की खराबी में लाभकारी है। दृष्टिवर्द्धक, स्नायु को शक्ति देने वाली है। घी में इसका चूर्ण मिलाकर घाव पर लगाया जा सकता है। प्रतिदिन की मात्रा : 3 से 5 ग्राम | त्रिदोषीय स्थिति दूषित वात व पित्त में लाभप्रद । वीर्य : ठंडा ।


खाद्य पदार्थों में तथा भोजन के बाद मुख शुद्धि के लिए सौंफ का प्रयोग किया जाता है। सौफ का तेल दर्द दूर करने के लिए प्रयुक्त होता है। सौंफ के दाने हल्के हरे रंग के तथा मीठे होते हैं। 3 से 6 ग्राम प्रतिदिन अथवा 5 से 10 बूंदें इसके तेल की प्रतिदिन प्रयोग की जानी चाहिए। सौंफ के बीज मूत्रल होते है। त्रिदोषीय स्थिति : यह दूषित वात तथा पित्त को शांत करती है। रस: मधुर, कटु, कषाय । वीर्य : ठंडा ।


मुलैठी


इसके पौधे की जड़ इस्तेमाल की जाती है। मुलैठी चीनी से 50 गुना • ज्यादा मीठी होती है। गले की खराबी में लाभकारी है। दृष्टिवर्द्धक, स्नायु को शक्ति देने वाली है। घी में इसका चूर्ण मिलाकर घाव पर लगाया जा सकता है। प्रतिदिन की मात्रा : 3 से 5 ग्राम | त्रिदोषीय स्थिति दूषित वात व पित्त में लाभप्रद । वीर्य : ठंडा ।


खाद्य पदार्थों में तथा भोजन के बाद मुख शुद्धि के लिए सौंफ का प्रयोग किया जाता है। सौफ का तेल दर्द दूर करने के लिए प्रयुक्त होता है। सौंफ के दाने हल्के हरे रंग के तथा मीठे होते हैं। 3 से 6 ग्राम प्रतिदिन अथवा 5 से 10 बूंदें इसके तेल की प्रतिदिन प्रयोग की जानी चाहिए। सौंफ के बीज मूत्रल होते है। त्रिदोषीय स्थिति : यह दूषित वात तथा पित्त को शांत करती है। रस: मधुर, कटु, कषाय । वीर्य : ठंडा ।


मुलैठी


इसके पौधे की जड़ इस्तेमाल की जाती है। मुलैठी चीनी से 50 गुना • ज्यादा मीठी होती है। गले की खराबी में लाभकारी है। दृष्टिवर्द्धक, स्नायु को शक्ति देने वाली है। घी में इसका चूर्ण मिलाकर घाव पर लगाया जा सकता है। प्रतिदिन की मात्रा : 3 से 5 ग्राम | त्रिदोषीय स्थिति दूषित वात व पित्त में लाभप्रद । वीर्य : ठंडा ।


खाद्य पदार्थों में तथा भोजन के बाद मुख शुद्धि के लिए सौंफ का प्रयोग किया जाता है। सौफ का तेल दर्द दूर करने के लिए प्रयुक्त होता है। सौंफ के दाने हल्के हरे रंग के तथा मीठे होते हैं। 3 से 6 ग्राम प्रतिदिन अथवा 5 से 10 बूंदें इसके तेल की प्रतिदिन प्रयोग की जानी चाहिए। सौंफ के बीज मूत्रल होते है। त्रिदोषीय स्थिति : यह दूषित वात तथा पित्त को शांत करती है। रस: मधुर, कटु, कषाय । वीर्य : ठंडा ।


मुलैठी


इसके पौधे की जड़ इस्तेमाल की जाती है। मुलैठी चीनी से 50 गुना • ज्यादा मीठी होती है। गले की खराबी में लाभकारी है। दृष्टिवर्द्धक, स्नायु को शक्ति देने वाली है। घी में इसका चूर्ण मिलाकर घाव पर लगाया जा सकता है। प्रतिदिन की मात्रा : 3 से 5 ग्राम | त्रिदोषीय स्थिति दूषित वात व पित्त में लाभप्रद । वीर्य : ठंडा ।

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