इसकी फली गहरे बादामी रंग की होती है जबकि इसके बीज फली से अधिक गहरे रंग के होते हैं। इन्हें इस्तेमाल करने के लिए फली को छीलना चाहिए। यह थकान शांत करती है तथा निम्न रक्तचाप को ठीक करती है। उच्च रक्तचाप की स्थिति में इसका -इस्तेमाल ठीक नहीं है। यह खांसी में उपयोगी है तथा खांसी की अनेक औषधियों में प्रयुक्त होती है। ठंड से होने वाले ज्वर या दर्द को ठीक करती है। प्रतिदिन की खुराक एक से तीन ग्राम। त्रिदोषीय स्थिति : तीनों दोषों के लिए ठीक है। विकृति में उन्हें संतुलित करती है। रस: मधुर, कटु । वीर्य ठंडा ।
इसकी फली गहरे बादामी रंग की होती है जबकि इसके बीज फली से अधिक गहरे रंग के होते हैं। इन्हें इस्तेमाल करने के लिए फली को छीलना चाहिए। यह थकान शांत करती है तथा निम्न रक्तचाप को ठीक करती है। उच्च रक्तचाप की स्थिति में इसका -इस्तेमाल ठीक नहीं है। यह खांसी में उपयोगी है तथा खांसी की अनेक औषधियों में प्रयुक्त होती है। ठंड से होने वाले ज्वर या दर्द को ठीक करती है। प्रतिदिन की खुराक एक से तीन ग्राम। त्रिदोषीय स्थिति : तीनों दोषों के लिए ठीक है। विकृति में उन्हें संतुलित करती है। रस: मधुर, कटु । वीर्य ठंडा ।
0 Comments