सोया
यह पौधा भारत के अतिरिक्त पश्चिमी देशों तथा दुनिया के अनेक देशों में व्यापक रूप में पाया जाता है। अतः इसे पहचानना कठिन नहीं है। दक्षिणी यूरोप की रसोई में इसका इस्तेमाल बहुत किया जाता है। बीज तथा तेल औषधि के रूप में काम में लाए जाते हैं। यह पाचन में सहायक है। यह साधारण ज्वर, भूख की कमी, बीमारी तथा पेट दर्द में औषधि का काम करती है। मासिक धर्म के दर्द को शांत करती है। प्रतिदिन की मात्रा : फलों का चूर्ण 1 से 3 ग्राम । तेल 1 से 3 बूंदें । अर्क 20 मिली से 40 मिली। त्रिदोषीय स्थिति कफ व वातशामक । रस: कटु, तिक्त । वीर्य : गर्म ।
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