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तुलसी

 तुलसी


अनेक नुस्खों में तुलसी का वर्णन आता है। यह भारत का घरेलू पौधा है। हिंदू तुलसी के पौधे को पवित्र मानते हैं तथा इसकी पूजा करते हैं। हिंदू घरों में एक छोटा सा दीपक हर शाम तुलसी के पौधे के सामने जलाया जाता है। इसकी पतियां अनेक साधारण रोगों मे औषधि का काम करती हैं। दक्षिणी यूरोप में यह पौधा सामान्य रूप से पाया जाता है, परंतु उत्तरी यूरोप की ठंडी जलवायु में उगाए जाने पर यह अपने औषधीय गुण खो देता है। इसके बीज भी तीन से पांच ग्राम प्रतिदिन पीसकर औषधि के रूप में लिए जा सकते हैं। तुलसी की पतियों का अर्क एक चाय चम्मच, अदरक का रस आधी चाय चम्मच तथा 3 काली मिर्चों का मिश्रण साधारण ज्वर, खांसी, -सर्दी तथा अपच दूर करने के लिए औषधि का काम करते हैं। शिशुओं को तुलसी के ताजा पत्तों के रस की कुछ बूंदें शहद के साथ मिलाकर रोज चटा देनी चाहिए। तुलसी की 6 पत्तियां 3 काली मिर्चों के साथ प्रतिदिन लेने से मलेरिया नहीं होता। पतियों को छाया में सुखाना चाहिए तथा अधिक समय तक नहीं रखना चाहिए अन्यथा उनके औषधीय गुण नष्ट हो जाते हैं। प्रतिदिन की मात्रा 5-6 पतियां । त्रिदोषीय स्थिति : तुलसी दूषित कफ तथा वात को ठीक करती है तथा पित्त बढ़ाती है । रस: कटु, तिक्त। वीर्य : गर्म

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